सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

क्या साधु सुंदर सिंह के पास चंगा करने की शक्ति थी

मेरे प्यारे दोस्तों, क्या आप कभी किसी ऐसे इंसान से मिले हैं या उनके बारे में सुना है, जिसके पास जाते ही आपको लगे कि आपकी सारी परेशानियां दूर हो गईं? आज हम एक ऐसे ही इंसान के बारे में बात करने वाले हैं। उनका नाम था साधु सुंदर सिंह। लुधियाना के एक अमीर सिख परिवार से 'ईसाई साधु' बनने तक का उनका कठिन सफर हम में से बहुत से लोगों को आज भी हैरान कर देता है।



​एक ऐसा लड़का जिसके पास धन, दौलत और सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी, उसने अचानक सब कुछ छोड़ दिया और एक गेरुआ चोगा पहनकर नंगे पैर जंगलों और बर्फीले पहाड़ों की ओर निकल पड़ा। क्यों? क्योंकि उसे सच्ची शांति की तलाश थी।

​अब अधिक समय न लेते हुए आगे बढ़ते हैं और सीधे अपने मुख्य सवाल पर आते हैं।

​क्या साधु सुंदर सिंह के पास सच में चंगा करने की शक्ति थी?

​आईए अब जानते हैं कि लोग उनके बारे में क्या कहते थे। जब साधु सुंदर सिंह भारत के गांवों और तिब्बत के खतरनाक पहाड़ों में यात्रा करते थे, तो उनके बारे में कई खबरें फैलने लगीं। लोग आपस में बातें करते थे कि यह साधु कोई आम इंसान नहीं है। इसके पास अद्भुत शक्तियां हैं। जब यह प्रार्थना करता है, तो बीमार ठीक हो जाते हैं और लोगों के दुख दूर हो जाते हैं।

​सुनने में यह किसी फिल्म की कहानी जैसा लगता है न? लेकिन उन दिनों लोग सच में उन पर बहुत गहरा विश्वास करते थे। जहाँ भी वह जाते, बीमार और परेशान लोगों की भीड़ उनके आस-पास जमा हो जाती थी। हर कोई चाहता था कि साधु जी बस एक बार उनके सिर पर हाथ रख दें और उनकी सारी बीमारियां छूमंतर हो जाएं।

​लुधियाना का वह विद्रोही लड़का

​इससे पहले कि हम उनके चमत्कारों की बात करें, उनके बचपन का एक छोटा सा किस्सा जानना बहुत जरूरी है। लुधियाना के पास एक जगह है रामपुर। वहीं के एक बेहद अमीर सिख परिवार में सुंदर सिंह का जन्म हुआ था। बचपन में उनकी माँ उन्हें साधुओं की संगति में ले जाती थीं और हमेशा कहती थीं कि "बेटा, तुम्हें बड़ा होकर एक साधु बनना है और मन की शांति खोजनी है।"

​लेकिन जब वह केवल चौदह साल के थे, तब उनकी माँ का निधन हो गया। इस घटना ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया। वह इतने गुस्से में आ गए कि उन्होंने धर्म से ही बगावत कर दी। उन्होंने एक दिन अपने घर के आंगन में आग जलाई और उसमें पवित्र बाइबिल के पन्ने फाड़कर फेंक दिए। उनका परिवार हैरान था।

​पर फिर एक रात ऐसा कुछ हुआ जिसने सब पलट दिया। उन्होंने तय किया था कि अगर उन्हें ईश्वर नहीं मिला तो वह सुबह रेलगाड़ी के आगे कूदकर जान दे देंगे। उसी रात भोर से पहले, उन्होंने एक दिव्य रोशनी देखी और उन्हें ईसा मसीह के दर्शन हुए। बस, वहीं से लुधियाना के उस अमीर लड़के का जिंदगी भर के लिए एक भटकता हुआ 'साधु' बनने का सफर शुरू हो गया।

​तिब्बत के पहाड़ों का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला किस्सा

​विषय को और अच्छे से समझने के लिए, मैं आपको एक कहानी सुनाता हूँ। साधु सुंदर सिंह अक्सर तिब्बत जाया करते थे। वह जगह उन दिनों बाहरी प्रचारकों के लिए बहुत खतरनाक मानी जाती थी।

​एक बार की बात है। तिब्बत के एक इलाके में वहां के लामा ने सुंदर सिंह को पकड़ लिया। उन्हें एक बहुत खौफनाक सजा दी गई। उन्हें एक ऐसे सूखे कुएं में फेंक दिया गया, जो सड़ी-गली लाशों से भरा हुआ था। कुएं के ऊपर से एक भारी ढक्कन लगा दिया गया और उसे ताला मार दिया गया।

​अंधेरा, बदबू और मौत का डर। कोई भी आम इंसान वहां कुछ ही घंटों में दम तोड़ देता। तीन दिन बीत गए। सुंदर सिंह लगातार प्रार्थना कर रहे थे। अचानक, तीसरी रात किसी ने कुएं का ढक्कन खोला। नीचे एक रस्सी आई। एक आवाज ने उन्हें रस्सी पकड़ने को कहा। सुंदर सिंह ने रस्सी पकड़ी और उन्हें बाहर खींच लिया गया। जब उन्होंने ऊपर आकर देखा, तो वहां कोई नहीं था। ढक्कन वापस बंद था और ताला वैसे का वैसा ही लगा था।

​क्या यह एक चमत्कार था? बिल्कुल। जब यह बात लोगों को पता चली, तो उन्हें लगा कि इस साधु के पास कोई जादुई ताकत है जो मौत को भी हरा सकती है।

​चंगाई (Healing) की असली सच्चाई क्या है?

​जहां तक वास्तविकता की बात है, साधु सुंदर सिंह ने खुद कभी यह दावा नहीं किया कि उनके पास कोई जादुई छड़ी है या वह कोई जादूगर हैं। जब लोग अपने बीमार बच्चों या रिश्तेदारों को लेकर उनके पास आते थे और कहते थे, "साधु जी, इन्हें चंगा कर दीजिए," तो वह बहुत विनम्रता से जवाब देते थे।

​वह हमेशा कहते थे, "मैं तो बस एक साधारण सा इंसान हूँ। मेरे हाथों में कोई ताकत नहीं है। चंगा करने वाला तो वह ऊपर बैठा ईश्वर है।"

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

साधु सुंदर सिंह की तिब्बत यात्रा के दौरान 'कैलाश के महर्षि' से मुलाकात का पूरा सच।

साधु सुंदर सिंह की तिब्बत यात्रा और 'कैलाश के महर्षि' का रहस्य: एक अनसुनी दास्तान मेरे प्यारे दोस्तों, आज हम एक ऐसे विषय पर चर्चा करने जा रहे हैं, जो न केवल अध्यात्म की गहरी परतों को छूता है, बल्कि जिसे सुनकर आधुनिक विज्ञान और तर्क भी सोच में पड़ जाते हैं। यह कहानी है 'भारत के प्रेरित' कहे जाने वाले साधु सुंदर सिंह की और उनकी उस रहस्यमयी मुलाकात की, जो उन्होंने तिब्बत की बर्फीली चोटियों में 'कैलाश के महर्षि' के साथ की थी। इतिहास की गलियों में कई ऐसी घटनाएं दर्ज हैं जो हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि क्या वाकई इस दुनिया से परे भी कोई दुनिया है? क्या आज भी ऐसे सिद्ध पुरुष मौजूद हैं जो सैकड़ों वर्षों से जीवित हैं? आइए अब जानते हैं इस अद्भुत घटनाक्रम का पूरा सच। कौन थे साधु सुंदर सिंह ? इससे पहले कि हम उनकी तिब्बत यात्रा के रोमांचक पड़ावों पर बात करें, हमें यह समझना होगा कि साधु सुंदर सिंह कौन थे। पंजाब के एक धनी सिख परिवार में जन्मे सुंदर सिंह का शुरुआती जीवन विलासिता और धार्मिक कट्टरता के बीच बीता। लेकिन एक रात उनके जीवन में ऐसा मोड़ आया जिसने उन्हें ईसा मसी...

क्या साधु सुंदर सिंह आज भी जीवित हैं? उनकी रहस्यमयी गुमशुदगी के पीछे के तर्क

 नमस्ते मेरे प्यारे दोस्तों! कैसे हैं आप सब? आज मैं आपके साथ एक ऐसी कहानी साझा करना चाहता हूँ जिसने दशकों से न केवल इतिहासकारों को बल्कि आध्यात्मिक खोजियों को भी हैरत में डाल रखा है। हम बात कर रहे हैं 'एशिया के प्रेरित' कहे जाने वाले साधु सुंदर सिंह की। क्या आपको कभी ऐसा लगा है कि कुछ लोग इस दुनिया में सिर्फ एक मकसद के लिए आते हैं और जब वो मकसद पूरा हो जाता है, तो वे हवा में कपूर की तरह ओझल हो जाते हैं? सुंदर सिंह के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। आज भी लोग पूछते हैं—क्या वह आज भी कहीं जीवित हैं? या फिर हिमालय की बर्फीली चोटियों ने उन्हें हमेशा के लिए अपनी गोद में सुला लिया? साधु सुंदर सिंह का शुरुआती सफर आईए अब जानते हैं उस इंसान के बारे में जिसने अपनी ऐशो-आराम की जिंदगी को एक पल में छोड़ दिया। पंजाब के एक अमीर परिवार में जन्मे सुंदर सिंह का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। जहाँ तक वास्तविकता की बात है, उनकी माँ चाहती थीं कि वह एक साधु बनें, लेकिन सुंदर सिंह बचपन में ईसाई धर्म के सख्त खिलाफ थे। यहाँ तक कि उन्होंने बाइबिल भी जलाई थी। लेकिन कहते हैं न कि तकदीर को कुछ और ही मंजूर था।...

साधु सुंदर सिंह ने क्यों कहा, "मैं ईसाई धर्म का प्रचार नहीं, मसीह का प्रचार करता हूँ"

 मेरे प्यारे दोस्तों, आज मैं आपके साथ एक ऐसी शख्सियत की कहानी साझा करना चाहता हूँ जिसने मुझे अंदर तक झकझोर दिया। जब मैंने पहली बार साधु सुंदर सिंह के बारे में पढ़ा, तो मुझे लगा कि यह सिर्फ एक धर्म बदलने वाले व्यक्ति की कहानी है। लेकिन जैसे-जैसे मैं उनकी जिंदगी की गहराइयों में गया, मुझे समझ आया कि यह तो प्यार और एक अटूट खोज की दास्तां है। लुधियाना के एक बेहद अमीर और रसूखदार सिख परिवार में जन्मे सुंदर सिंह के पास वह सब कुछ था जिसका लोग सपना देखते हैं। रेशमी कपड़े, बड़ा बंगला और समाज में ऊंचा नाम। लेकिन उनके मन में एक अजीब सी छटपटाहट थी। वह शांति की तलाश में थे, जो उन्हें न तो दौलत में मिल रही थी और न ही उस समय के धार्मिक रीति-रिवाजों में। जैसा कि मैंने अनुभव किया है, अक्सर जब इंसान के पास सब कुछ होता है, तभी उसे सबसे ज्यादा खालीपन महसूस होता है। सुंदर सिंह के साथ भी यही हुआ।  उस रात का वो मंजर जिसने सब बदल दिया एक रात ऐसी आई जब उन्होंने तय कर लिया कि अगर आज ईश्वर नहीं मिला, तो वह अपनी जान दे देंगे। उन्होंने रेल की पटरी पर लेटकर जान देने की ठान ली थी। लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ जिसे आज भ...