मेरे प्यारे दोस्तों, कैसे हैं आप सब? आज मैं आपके साथ एक बहुत ही खास और अनोखी कहानी शेयर करने जा रहा हूँ। आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सभी शांति खोज रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आज से लगभग सौ साल पहले एक इंसान ने आज के हालातों को लेकर कुछ बहुत ही सटीक बातें कह दी थीं? आज हम बात करेंगे साधु सुंदर सिंह के बारे में।
अगर आपने उनका नाम नहीं सुना है, तो मैं आपको बता दूँ कि उनकी कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है। लुधियाना के एक अमीर सिख परिवार से लेकर एक 'ईसाई साधु' बनने तक का उनका कठिन सफर हम सभी के लिए एक बड़ी सीख है।
अब अधिक समय न लेते हुए आगे बढ़ते हैं और इस सफर की शुरुआत से बात करते हैं।
लुधियाना के एक अमीर सिख परिवार से एक फकीर बनने का सफर
मैंने देखा है कि अक्सर लोग सोचते हैं कि पैसा सब कुछ खरीद सकता है। लेकिन सुंदर सिंह की कहानी हमें बताती है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। उनका जन्म 1889 में लुधियाना के पास एक बहुत ही रईस सिख परिवार में हुआ था। उनकी माँ एक बहुत ही धार्मिक महिला थीं। वे बचपन में सुंदर को जंगलों में रहने वाले साधुओं के पास ले जाती थीं और कहती थीं, "बेटा, तुम्हें दुनियादारी में नहीं फंसना है, तुम्हें एक सच्चा साधु बनना है।"
लेकिन जब सुंदर केवल 14 साल के थे, तब उनकी माँ इस दुनिया से चली गईं। इस बात का उनके मन पर इतना गहरा असर हुआ कि वे बहुत गुस्से में रहने लगे। उन्हें लगता था कि अगर कोई ईश्वर है, तो उसने मेरी माँ को क्यों छीन लिया? उन्होंने अपने ही घर के आंगन में ईसाई धर्म की पवित्र किताब 'बाइबल' को आग लगा दी थी। वे इतने निराश हो चुके थे कि उन्होंने तय कर लिया कि अगर उन्हें ईश्वर नहीं मिला, तो वे रेल की पटरी पर लेटकर अपनी जान दे देंगे।
लेकिन तभी उनके जीवन में एक चमत्कार हुआ। जिस रात उन्होंने जान देने की सोची थी, उसी रात उन्हें एक तेज रोशनी दिखाई दी और उन्होंने ईसा मसीह को देखा। बस, वह एक पल था जिसने उस अमीर लड़के की पूरी जिंदगी पलट दी। उन्होंने सुख-सुविधाएं, पैसा, घर-परिवार सब छोड़ दिया और एक गेरुआ चोला पहनकर नंगे पैर चलने वाले एक ईसाई साधु बन गए।
यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। उनके अपने ही परिवार ने उन्हें घर से निकाल दिया था। कई बार उन्हें जहर देकर मारने की कोशिश भी की गई। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
भारत के आध्यात्मिक भविष्य को लेकर भविष्यवाणी
आईए अब जानते हैं कि अपने इस लंबे सफर में उन्होंने हमारे देश भारत और पूरी दुनिया के लिए क्या भविष्यवाणियां की थीं।
साधु सुंदर सिंह को भारत की मिट्टी से गहरा लगाव था। उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि भारत दुनिया के लिए एक आध्यात्मिक गुरु बनेगा। उन्होंने कहा था कि पश्चिमी देशों (Europe और America) के पास चाहे कितना भी पैसा और विज्ञान आ जाए, लेकिन जब उनकी आत्मा प्यासी होगी, तो उन्हें पानी भारत ही पिलाएगा।
मुझे लगता है कि उनकी यह बात आज पूरी तरह से सच साबित हो रही है। आज हम देखते हैं कि विदेशों से हजारों लोग हर साल मन की शांति खोजने के लिए हमारे देश के आश्रमों और पहाड़ों में आते हैं। सुंदर सिंह का मानना था कि एक ऐसा समय आएगा जब भारत के लोग अपनी पुरानी और सच्ची आध्यात्मिक जड़ों की तरफ लौटेंगे। लोग सिर्फ दिखावे के लिए मंदिर या चर्च नहीं जाएंगे, बल्कि वे अपने अंदर ईश्वर को खोजेंगे।
पश्चिमी दुनिया और भौतिकवाद (Materialism) पर चेतावनी
जहां तक वास्तविकता की बात है, साधु सुंदर सिंह सिर्फ भारत में ही नहीं घूमे, बल्कि वे यूरोप और अमेरिका भी गए थे। वहां के लोग उन्हें देखने के लिए भारी संख्या में इकट्ठा होते थे। लेकिन सुंदर सिंह वहां की चकाचौंध से बिल्कुल भी प्रभावित नहीं हुए।
उन्होंने पश्चिमी दुनिया के बारे में एक बहुत ही सख्त भविष्यवाणी की थी। उन्होंने कहा था कि ये देश पैसों और मशीनों के पीछे इतना भाग रहे हैं कि एक दिन यही चीजें इन्हें बर्बाद कर देंगी। उन्होंने एक बहुत ही सुंदर उदाहरण दिया था।
उन्होंने कहा था, "पश्चिमी देश उस चिड़िया की तरह हैं, जिसे एक सोने के पिंजरे में रखा गया है। पिंजरा बहुत खूबसूरत है, उसमें खाने-पीने की कोई कमी नहीं है, लेकिन वह चिड़िया उड़ना भूल गई है।"
उनका साफ कहना था कि लोग बाहर से तो बहुत सजे-धजे और अमीर दिखेंगे, लेकिन अंदर से वे बिल्कुल खोखले होंगे। आज जब हम देखते हैं कि दुनिया में हर सुख-सुविधा होने के बाद भी लोग अकेलेपन, डिप्रेशन और तनाव से जूझ रहे हैं, तो उनकी यह भविष्यवाणी बिल्कुल सच लगती है।
स्वार्थ से भरी दुनिया और एक नया सवेरा
साधु जी अपनी बात समझाने के लिए अक्सर छोटी-छोटी कहानियों का इस्तेमाल करते थे। चलिए, मैं आपको उनकी एक बहुत ही मशहूर कहानी सुनाता हूँ।
एक बार वे तिब्बत के बर्फीले पहाड़ों से गुजर रहे थे। कड़ाके की ठंड थी और बर्फबारी हो रही थी। उनके साथ एक और यात्री भी था। अचानक उन्होंने देखा कि रास्ते में एक आदमी बर्फ में गिरा हुआ है और ठंड से जम रहा है। साधु जी के साथी ने कहा, "इसे यहीं छोड़ दो, अगर हम इसे बचाने के चक्कर में पड़े, तो हम भी ठंड से मर जाएंगे।" ऐसा कहकर वह साथी तेजी से आगे निकल गया।
लेकिन साधु सुंदर सिंह ने उस जमे हुए आदमी को वहीं नहीं छोड़ा। उन्होंने उसे अपनी पीठ पर उठा लिया और धीरे-धीरे चलने लगे। उस आदमी के वजन और साधु जी के चलने की वजह से दोनों के शरीरों के बीच एक गर्मी पैदा हुई। इस गर्मी से साधु जी भी ठंड से बच गए और वह अधमरा आदमी भी जिंदा हो गया।
लेकिन जब वे थोड़ा आगे पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि जो साथी उन्हें छोड़कर खुद की जान बचाने के लिए भागा था, वह रास्ते में ही ठंड से जम कर मर चुका था।
जैसा कि मैंने अनुभव किया है, इस कहानी के जरिए वे हमें समझाना चाहते थे कि जब इंसान सिर्फ अपने स्वार्थ के बारे में सोचता है, तो वह खुद अपना ही नुकसान करता है। उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि जब दुनिया स्वार्थ और लालच से भर जाएगी, तब इंसानियत ही हमें बचाएगी। जो दूसरों की मदद करेगा, उसी की आत्मा सुरक्षित रहेगी।
हिमालय के रहस्य और गुप्त संत
साधु सुंदर सिंह हर साल गर्मियां शुरू होते ही तिब्बत और हिमालय के दुर्गम इलाकों में चले जाते थे। वहां उन्होंने कई अजीबोगरीब चीजों का सामना किया।
उन्होंने दुनिया को बताया था कि हिमालय की बर्फ से ढकी गुफाओं में आज भी ऐसे कई पहुंचे हुए 'महर्षि' और संत तपस्या कर रहे हैं, जो दुनिया की नजरों से पूरी तरह छिपे हुए हैं। उन्होंने एक 'कैलाश के महर्षि' का जिक्र किया था, जिनकी उम्र सैकड़ों साल थी। साधु जी के अनुसार, ये संत दुनिया के सामने नहीं आते, लेकिन वे अपनी प्रार्थनाओं के जरिए पूरी इंसानियत की भलाई का काम कर रहे हैं।
उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि जब दुनिया में पाप और बुराई अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाएगी, तब यह छिपा हुआ आध्यात्मिक ज्ञान दुनिया के सामने आएगा और भटके हुए इंसानों को रास्ता दिखाएगा।
धर्म का सच्चा मतलब और आने वाला कल
साधु सुंदर सिंह ने साफ शब्दों में कहा था कि आने वाले समय में बड़ी-बड़ी इमारतें, भव्य चर्च या मंदिर लोगों को शांति नहीं दे पाएंगे।
उन्होंने कहा था, "ईश्वर किसी पत्थर या ईंट की इमारत में नहीं रहता, वह तो इंसानों के दिलों में रहता है।"
उन्होंने एक समय की भविष्यवाणी की थी जब लोग धर्म के नाम पर लड़ना छोड़ देंगे। लोग दिखावटी कर्मकांडों से ऊब जाएंगे और तब एक सच्चा धर्म सामने आएगा — प्यार और इंसानियत का धर्म। लोग समझेंगे कि अगर आप अपने पड़ोसी से प्यार नहीं कर सकते जिसे आप देख सकते हैं, तो आप उस ईश्वर से कैसे प्यार कर सकते हैं जिसे आपने कभी देखा ही नहीं?
एक रहस्यमयी विदाई
मेरे प्यारे दोस्तों, इस महान साधु का अंत भी उतना ही रहस्यमयी रहा जितना उनका जीवन था। साल 1929 की बात है, जब उनका स्वास्थ्य काफी खराब रहने लगा था। डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने को कहा था। लेकिन उनके अंदर तिब्बत जाने की एक अलग ही तड़प थी।
उन्होंने किसी की नहीं सुनी और 1929 की गर्मियों में वे हिमालय की तरफ निकल पड़े। उसके बाद उन्हें किसी ने नहीं देखा। कई लोगों ने उन्हें ढूँढने की कोशिश की, सरकार ने भी पता लगाया, लेकिन वे बर्फ के उन पहाड़ों में कहीं गायब हो गए।
भले ही वे आज हमारे बीच शारीरिक रूप से नहीं हैं, लेकिन उन्होंने जो बातें कहीं, जो रास्ते दिखाए और जो भविष्यवाणियां कीं, वे आज भी हमें सोचने पर मजबूर कर देती हैं।
आज जब हम हर तरफ नफरत, पैसे की दौड़ और पर्यावरण का विनाश देखते हैं, तो साधु सुंदर सिंह की चेतावनियां कानों में गूंजती हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन बिना पैसे, बिना घर और बिना किसी सुख-सुविधा के बिताया, फिर भी वे दुनिया के सबसे खुश और शांत इंसान थे।
बस, आज के सफर में इतना ही। आप साधु सुंदर सिंह की इन बातों और उनके जीवन के बारे में क्या सोचते हैं? अपने मन में जरूर विचार कीजिएगा। मिलते हैं जल्द ही एक और नई और सच्ची कहानी के साथ। तब तक अपना और अपनों का बहुत सारा ख्याल रखें!

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें